न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Thu, 03 May 2018 10:20 AM IST
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जिन राज्यों के ज्यादा से ज्यादा जिलों को इस योजना के अंतर्गत फायदा होगा उनमें उत्तर प्रदेश के 43, महाराष्ट्र के 27, कर्नाटक, बंगाल और राजस्थान के 16, गुजरात, अरुणाचल प्रदेश और केरल के 13, तमिलनाडु के 12, मध्य प्रदेश के 8, हरियाणा और मणिपुर के 7 और पंजाब के 2 जिले शामिल हैं। इस कार्यक्रम के तहत अल्पसंख्यक बहुल क्षेत्रों में स्कूल, छात्रावास आदि का निर्माण करने के साथ ही दूसरे विकास योजनाओं को चलाया जाएगा।
प्रधानमंत्री जन विकास कार्यक्रम योजना (पीएमजेवीके) के तहत 33 फीसदी से 40 फीसदी संसाधन खासतौर से महिला केंद्रित परियोजनाओं के लिए आवंटित किए जाएंगे। इस मामले पर अल्पसंख्यक मंत्रालय का कहना है कि पीएमजेवीके के तहत 80 फीसदी संसाधनों को शिक्षा, स्वास्थ्य और कौशल विकास से संबंधित परियोजनाओं के लिए निर्धारित किया जाएगा। मंत्रालय के अनुसार यह कार्यक्रम पिछड़ापन के मापदंड पर राष्ट्रीय औसत और अल्पसंख्यक समुदायों के बीच की खाई को पाटने की एक कोशिश है।
बहु-क्षेत्रीय विकास कार्यक्रम को साल 2008 में लॉन्च किया गया था जिसका अब इसका नाम बदलकर पीएमजेवीके रख दिया गया है। अब यह पांच और राज्यों के साथ ही केंद्र शासित प्रदेश को कवर करेगा। जिनमें हिमाचल प्रदेश, तमिलनाडु, नगालैंड, गोवा और पुड्डुचेरी शामिल हैं। इसके अलावा अल्पसंख्यक बहुल सबसे पिछड़े 61 महत्वकांक्षी जिलों को भी इस योजना के दायरे में लाया गया है।
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